Pooja Date: 05 November, 2026 | कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) से कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीपावली महापर्व — 5 से 8 नवम्बर 2026)
🪔✨ दीपावली महालक्ष्मी-कुबेर-गणेश धन समृद्धि महापूजा 2026 ✨🪔
🔱 1 वैदिक ब्राह्मण पंडित जी एवं 108 शुद्ध पूजन सामग्रियां पूर्णतः सम्मिलित 🔱
📅 पावन तिथियां: 5 से 8 नवम्बर 2026 (धनतेरस से गोवर्धन पूजा महापर्व)
🌸 पावन आध्यात्मिक परिचय (Divine Significance)
कार्तिक कृष्ण अमावस्या की महानिशा में समुद्र मंथन से साक्षात ऐश्वर्य, अक्षय वैभव और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी माँ महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। दीपावली का यह महापर्व वर्ष की सबसे ऊर्जावान और सिद्ध रात्रि माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस काल में की गई साधना और पूजन से दारिद्रय का समूल नाश होता है और घर-परिवार में 'स्थिर लक्ष्मी' का वास होता है।
श्री तत्त्वप्रियायै द्वारा 5 से 8 नवम्बर 2026 के पावन महापर्व पर विशेष महालक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की संयुक्त महापूजा का आयोजन किया जा रहा है। आप इसे घर बैठे ऑनलाइन लाइव संकल्प द्वारा अथवा प्रत्यक्ष अपने घर/व्यापार स्थल पर 1 विद्वान ब्राह्मण पंडित जी द्वारा करवा सकते हैं।
🌟 त्रिशक्ति संयोजन — बुद्धि, धन एवं रक्षण (Trinity of True Prosperity)
🌿 प्रथम पूज्य गणेश जी: निर्विघ्नता, विवेक और सद्बुद्धि प्रदान करते हैं। बिना बुद्धि के अर्जित धन टिकता नहीं।
💰 माँ महालक्ष्मी: अष्टलक्ष्मी स्वरूप होकर धन, यश, संतान, धान्य और ऐश्वर्य का वरदान देती हैं।
👑 कुबेर देव: समस्त देवों के कोषाध्यक्ष हैं, जो अर्जित धन को संरक्षित कर अक्षय भंडार भरते हैं।
🎁 1 पंडित जी एवं सम्पूर्ण सामग्री सम्मिलित (100% Hassle-Free Divine Experience)
यजमान को किसी भी वस्तु के लिए परेशान होने की आवश्यकता नहीं है:
✔️ 1 विद्वान एवं सदाचारी वैदिक ब्राह्मण पंडित जी का चयन।
✔️ 108 सम्पूर्ण शास्त्रोक्त शुद्ध वैदिक पूजन सामग्रियां (शुद्ध गाय का घी, नवग्रह समिधा, हवन सामग्री, अष्टगंध, कमलगट्टा, हल्दी, सुपारी, कुंकुम, कलावा, धूप, दीप, गंगाजल आदि)।
✔️ पारदर्शी प्रक्रिया — कोई भी गुप्त या अतिरिक्त शुल्क नहीं।
🗓️ 4 दिवसीय महापर्व का विशेष अनुष्ठान क्रम (5 - 8 नवम्बर 2026)
1️⃣ 5 नवम्बर (धनतेरस): धन्वंतरि आरोग्य एवं कुबेर देव का विशेष पूजन व दीपदान।
2️⃣ 6 नवम्बर (रूप चौदस / नरक चतुर्दशी): यम दीपदान, नकारात्मक ऊर्जा विसर्जन एवं दैहिक-मानसिक शुद्धि।
3️⃣ 7 नवम्बर (दीपावली महापर्व): महानिशा में माँ महालक्ष्मी-गणेश षोडशोपचार पूजन, श्रीसूक्त व कनकधारा महायज्ञ।
4️⃣ 8 नवम्बर (गोवर्धन पूजा व अन्नकूट): प्रकृति एवं गो-माता के निमित्त अक्षय भंडार एवं अन्नकूट संकल्प।
📦 यजमान को प्राप्त होने वाला दिव्य आशीर्वाद (Ashirvad Box Contents)
📿 सिद्ध लक्ष्मी-कुबेर धन पोटली (घर की तिजोरी या गल्ले में रखने हेतु)
🔱 प्राण-प्रतिष्ठित श्रीयंत्र / कुबेर यंत्र
🎗️ महालक्ष्मी अभिमंत्रित रक्षा सूत्र
🍯 गंगाजल, पवित्र भस्म एवं महाप्रसाद
📹 पूजन एवं महाआरती की एक्सक्लूसिव वीडियो रिकॉर्डिंग व्हाट्सएप पर।
🙏 घर पर पूजा कैसे संपन्न होगी?
👉 ऑनलाइन यजमान: आपके नाम-गोत्र से काशी के पवित्र तीर्थ में संकल्प लेकर लाइव प्रसारण व वीडियो अपडेट दी जाएगी।
👉 ऑफलाइन यजमान: 1 विद्वान पंडित जी संपूर्ण पूजन सामग्री लेकर आपके घर/प्रतिष्ठान पहुंचेंगे और विधिपूर्वक पूजा संपन्न कराएंगे।
Vedic ritual and pooja performed directly at your personal residence, home, or office premises by verified Vedic Purohits.
Removes the obstacles that have been blocking your progress in life, career, or important undertakings.
Seeks divine blessings for growth, recognition, and new opportunities in your career.
Prayers for peace, understanding, and unity among family members.
Invokes divine blessings for financial growth, abundance, and prosperity.
Invokes divine blessings for the fulfilment of your sincere wishes and life goals.
यजमान एवं उनके पूरे परिवार का नाम, गोत्र और विशिष्ट मनोकामना (धन संचय, व्यापारिक उन्नति, ऋणमुक्ति, गृह शांति) का 1 विद्वान ब्राह्मण पंडित जी द्वारा विधिपूर्वक वैदिक संकल्प कराया जाता है।
सर्वविघ्न विनायक प्रथम पूज्य भगवान गणेश और माता गौरी की स्थापना कर पूजन किया जाता है। नवग्रहों का आवाहन कर कुंडली के समस्त ग्रह दोषों और वास्तु दोषों की शांति की जाती है।
108 कमल गट्टे, अष्टगंध, कुमकुम, अक्षत, दूर्वा, धूप-दीप और पंचामृत से माँ लक्ष्मी और धन के अधिपति कुबेर जी का शास्त्रोक्त षोडशोपचार पूजन एवं अभिषेक संपन्न होता है।
ऋग्वैदिक श्रीसूक्त एवं आद्य शंकराचार्य विरचित कनकधारा स्तोत्र के संपुटित पाठ के साथ शुद्ध गाय के घी, नवग्रह समिधा व विशेष हवन सामग्री द्वारा 108 दिव्य आहुतियों का महायज्ञ होता है।
कपूर महाआरती के उपरांत अभिमंत्रित लक्ष्मी-कुबेर धन पोटली (तिजोरी में रखने हेतु), सिद्ध श्रीयंत्र व रक्षा सूत्र का संकल्प कराकर यजमान के पते पर आशीर्वाद स्वरूप भेजा जाता है।
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